यहाँ हर कोई तब्दीली की बात करता है लेकिन यह तब्दीली होगी क्या, क्यों होगी और कैसे होगी यह बात क्यों नहीं होती। कोई कहता है के हर चीज़ नयी होनी चाहिए तो कोई कहता है के पुरानी चीज़ें फिर से वापस आनी चाहिएं, किसी का यह ख्याल है के कुछ बदलना ही नहीं चाहिए तो कोई कहता है के सब कुछ बदल जाना चाहिए। किसी को चीज़ों के बदलने का इंतेज़ार है तो कोई उन चीज़ों का इंतेज़ार कर रहा है जो बदल चुकी हैं, कोई इन बदलावों से परेशान है तो कोई इनसे बहुत खुश है।
तब्दीली कभी नए क़ानून हैं तो कभी नयी रस्में, कभी नए रासते तो कभी नयी मंज़िलें, कभी नयी उम्मीदें तो कभी नए ख्वाब।
कोई कहता है के तबदीली आ तो गयी है लेकिन दिखाई नहीं देती, इसको दिखाई देने में थोड़ा वक़्त लगेगा, कहीं ऐसा ना हो के यह तब्दीली दिखाई देने से पहले ही ख़त्म हो जाए और जिस तब्दीली का हमें ख्वाब दिखाया गया था वो इक झूठा ख्वाब बनकर रह जाए। क्या वो सारे वादे झूठे थे, क्या ख्वाब दिखाने वाला जानता था के ये दिन नहीं बदलेंगे, क्या वह जानता था के वह खुद ही बदल जाएगा, क्या उसकी इन बदली हुई बातों से फिर से कोई तब्दीली आएगी या लोग फिर किसी नए धोके से दो-चार होंगे।
तब्दीली कभी नए क़ानून हैं तो कभी नयी रस्में, कभी नए रासते तो कभी नयी मंज़िलें, कभी नयी उम्मीदें तो कभी नए ख्वाब।
कोई कहता है के तबदीली आ तो गयी है लेकिन दिखाई नहीं देती, इसको दिखाई देने में थोड़ा वक़्त लगेगा, कहीं ऐसा ना हो के यह तब्दीली दिखाई देने से पहले ही ख़त्म हो जाए और जिस तब्दीली का हमें ख्वाब दिखाया गया था वो इक झूठा ख्वाब बनकर रह जाए। क्या वो सारे वादे झूठे थे, क्या ख्वाब दिखाने वाला जानता था के ये दिन नहीं बदलेंगे, क्या वह जानता था के वह खुद ही बदल जाएगा, क्या उसकी इन बदली हुई बातों से फिर से कोई तब्दीली आएगी या लोग फिर किसी नए धोके से दो-चार होंगे।
वक़्त के साथ सब कुछ बदल जाएगा, तेरे हुस्न का भी यह नाज़ ख़त्म हो जाएगा, तेरी यह मधहोश जवानी भी ढल जाएगी, तेरा ये बात-बात पे मुस्कुराना तुझे बहुत रुलाएगा, तेरी ये सजने-सँवरने की आदत भी छूट जाएगी, तुझे अपनी बदली हुई सूरत बहुत सताएगी, तेरे इस खिलते हुए चेहरे की भी रंगत बदल जाएगी, तेरा यह आईने से इश्क़ भी ख़त्म हो जाएगा, तेरा यह महकता हुआ आँचल भी तेरे किस काम का होगा। मेरे भी ये बेबाक़ क़दम ज़मीन पे आहिस्ता-आहिस्ता पड़ेंगे, मेरा भी यह ख्याल के वक़्त मेरी मुट्ठी में है-यह वक़्त मेरे हाथों से निकल जाएगा, मैं भी शायद कभी इन रास्तो पे अपने क़दमों के निशान तलाश करूँगा, यह नज़र जो आज आसमानों में सितारे तलाश करती है यह कभी ज़मीन में खोयी हुई चीज़ें ढूंढा करेगी, शायद कुछ अपने हमसे दूर हो जाएंगे, शायद कुछ लोग हमसे बिछड़ जाएंगे। इससे पहले यह वक़्त हमको भी जुदा कर दे क्यों ना इन चाँदनी रातों में कुछ चाँद सी बातें करें, कभी मैं कोई ख्वाब दिखाऊं तो कभी तुम कोई वादा करो, इससे पहले ये दिन बदल जाएँ क्यों ना कुछ सुनहरी यादें अपने साथ ले लें जो कभी ना बदलें, जिनकी याद कभी हंसाए तो कभी रुलाए, जो कभी दिल को बहलाए तो कभी तड़पाए, तेरा साथ हो या ना हो कुछ बातें कुछ यादें हमेशा साथ हों।
वैसे तो यह क़ायनात हर लम्हे में बदल जाती है, जो इस पल है वो अगले पल नहीं होता, जो आज है वो कल नहीं रहता, जो गुज़र जाता है फिर वापस नहीं आता और अगर आता भी है तो वो भी बदला हुआ ही होता है।
जब बदलाव क़ुदरत का एक नियम है तो हमें इससे डर कैसा, क्यों ना इस बदलाव का सामना किया जाए, क्यों ना इसको समझा जाए के यह तब्दीली ज़रुरत पर होगी या बेज़रूरत, किसी के गम दूर करने के लिए होगी या किसी के ऐशो-आराम के लिए, यह किसी को फायदा पहुँचाने के लिए होगी या किसी को नुक्सान से बचाने के लिए, यह तब्दीली ज़ुल्म करेगी या इन्साफ की आवाज़ बनेगी, दिलो का सुकून बनेगी या फिर दिलो की तड़प का सबब।
जब बदलाव आना ही है तो क्यों ना इस बदलाव में शामिल हुआ जाए, क्यों ना इस बदलाव का हिस्सा बना जाए और ऐसी तब्दीली लाई जाए जिससे कोई नाराज़ ना हो, जिससे किसी का नुक्सान ना हो, जिसमें नयी चीज़ें तो हों लेकिन गुज़रे वक़्त की चीज़ों की भी कहानियाँ शामिल हों और आने वाले वक़्त की निशानियाँ भी, जिसमें एक ऐसी रौशनी हो जो अंधेरों को ख़त्म तो करे लेकिन किसी की आँखों की चुभन ना हो।
जब बदलाव क़ुदरत का एक नियम है तो हमें इससे डर कैसा, क्यों ना इस बदलाव का सामना किया जाए, क्यों ना इसको समझा जाए के यह तब्दीली ज़रुरत पर होगी या बेज़रूरत, किसी के गम दूर करने के लिए होगी या किसी के ऐशो-आराम के लिए, यह किसी को फायदा पहुँचाने के लिए होगी या किसी को नुक्सान से बचाने के लिए, यह तब्दीली ज़ुल्म करेगी या इन्साफ की आवाज़ बनेगी, दिलो का सुकून बनेगी या फिर दिलो की तड़प का सबब।
जब बदलाव आना ही है तो क्यों ना इस बदलाव में शामिल हुआ जाए, क्यों ना इस बदलाव का हिस्सा बना जाए और ऐसी तब्दीली लाई जाए जिससे कोई नाराज़ ना हो, जिससे किसी का नुक्सान ना हो, जिसमें नयी चीज़ें तो हों लेकिन गुज़रे वक़्त की चीज़ों की भी कहानियाँ शामिल हों और आने वाले वक़्त की निशानियाँ भी, जिसमें एक ऐसी रौशनी हो जो अंधेरों को ख़त्म तो करे लेकिन किसी की आँखों की चुभन ना हो।
Ishrat Alig
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