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ग़लतफ़हमी:

~ क्या किसी ग़लती का नाम ही ग़लतफ़हमी है या गलत को को सही समझ लेना ग़लतफ़हमी है, लेकिन गलत को सही समझ लेना तो खुशफ़हमी है, तो फिर ग़लतफ़हमी क्या है ?
क्या ग़लतफ़हमी किसी एहसास का नाम है या कोई ऐसा काम जिसे हमने सही जान लिया है और वो सही था ही नही या कोई ऐसा काम जिसे हमने गलत मान लिया लेकिन वो ग़लत नही था मसलन अगर कोई किसी की मुस्कुराहट को हाँ समझ लेता है तो मुस्कुराने वाला यही सोचेगा के ये ग़लतफ़हमी में है लेकिन कभी कोई किसी के गुस्से को ना समझ लेता है और शायद ऐसा था ही नही।
तो क्या किसी एक की ग़लतफ़हमी दूसरे की खुशफ़हमी है या फिर ऐसी कैफ़ियत जिसमें ग़लती करने वाले को ये एहसास ही नही के वो ग़लती कर रहा है या फिर सही करके भी उसे ग़लत समझ लेना ग़लतफ़हमी है।
ग़लतफ़हमी कभी नज़रों का धोका है तो कभी दिल को समझाने का एक तरीक़ा, कभी खुशी का एहसास तो कभी परेशानी का सबब।
अगर किसी ग़लतफ़हमी से किसी का दिल बहल जाता है तो इसमें ग़लत क्या है और अगर किसी खुशफ़हमी से किसी को ख़ुशी मिल जाती है तो इसमें बुराई भी क्या है।
Ishrat Alig

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