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रौशनी और अंधेरा:

कहते हैं के रौशनी रंगों का नाम है, रंगों में एक रंग तो काला भी है, तो फिर ये अंधेरा क्या है। कोई कहता है अंधेरा हर जगह है, रौशनी आती है और अंधेरा ख़त्म कर देती है। ये रौशनी आती हुई तो दिखाई देती है लेकिन ये चली कहाँ जाती है, अगर ये अँधेरा ख़त्म हो गया था तो फिर कैसे आ गया है, अगर ये कहीं चला गया था तो गया कहाँ था। आँखों में रौशनी है फिर भी आँखें बंद करो तो अँधेरा हो जाता है, आँखों की रौशनी को भी देखने के लिए रौशनी की ज़रुरत है। कभी ये रौशनी अंधेरे के ऊपर पड़ती है तो कभी ये अंधेरा साया बनके रौशनी के ऊपर चलता है।

किसी को रौशनी अच्छी लगती है तो किसी को अंधेरों से आशनाई है। कोई रौशनी में चमकना चाहता है तो कोई अंधेरों में भटकता है और इनमें खो जाना चाहता है। किसी को रौशनी में नींद नहीं आती तो किसी को अँधेरा परेशान करता है। कोई रात के अंधेरों में भी चमकता है तो कोई दिन की रौशनी में भी नज़र नहीं आता। कुछ अंधेरों में रहते हैं फिर उनकी ज़िन्दगी रोशन है और कुछ रौशनी के होते हुए भी अंधेरे में हैं।
ये रौशनी अनगिनत कहानियाँ कहती है लेकिन अंधेरे के पास भी कहानिओं की कमी तो नहीं। रात की शबनम का अंधेरे के बिना तसब्बुर भी नहीं किया जा सकता। चरागों का जलना भी अंधेरे के बिना क्या जलना है। क्या कभी किसी ने जुगनुओं को दिन में चमकते देखा है। यहाँ की महफिलें बिना अंधरे के परवान कैसे चढ़ेगीं। चाँद, सितारे, नानी-माँ के परियों के किस्से और ना जाने कितनी कहानियाँ अंधेरे में ही शुरू होती हैं और अंधेरे के साथ ख़त्म हो जाती हैं। इस अंधेरे के पास ना जाने कितने राज़ हैं, कितनी कहानियाँ अंधेरे में साये की तरह खो चुकी हैं।

रात में जलती हुई शमा और उसके इर्द-गिर्द परवानों का मंडराना किसने नहीं देखा। क्या ये परवानें शमा से प्यार करते इसिलए इसपे मर-मिटते हैं या इनको इससे कोई रंजिश है और ये इसे बुझाना चाहते हैं और अपनी जान न्योछावर कर देते हैं।
दिल उदास है अंधेरी रात में, सुबह का सूरज भी शायद इस उदासी को ख़त्म ना कर सकेगा। कोई आए किसी बहाने से दिल को बहलाए और हम भूल जाएं के रात दिलपे गुज़री क्या थी। आने वाला भी वक़्त की घड़ियाँ देखकर चला जाएगा और फिर वही अंधेरी रातों का सिलसिला होगा।

कोई दिन के उजाले में बैठकर रात के अंधेरे का इन्तेज़ार करता है और खुली आँखों से ख़्वाब देखता है के रात होगी फिर से उसकी दुनिया की शुरुआत होगी, कोई आएगा और उसके सपनों को पूरा कर देगा। उसे ये अच्छी तरह मालूम है के रात के अंधेरे में आने वाला झूठे नाम से झूठे ख़्वाब दिखाएगा और सबेरा होने से पहले ही सारे ख़्वाब तोड़कर चला जाएगा। वो हर रोज़ ये ख़्वाब देखता है और हर रोज़ ये ख़्वाब टूटते हैं। फिर भी ना जाने क्यों उसे यकीन है के कभी कोई रात के अंधरे में आएगा और अपना असली चेहरा दिखाएगा, अपना असली नाम बताएगा और उसे इस दुनिया से कहीं दूर लेजाएग। एक ऐसी दुनिया जहाँ उसे खुला आसमान देखने की इजाज़त होगी, जहाँ दिन भी उसका होगा और रात भी उसकी होगी। वो कभी रात में इंतज़ार करेगा तो कभी दिन में राह तकेगा। वो भी तितलियों का पीछा करेगा, वो भी जुगनुओं से बात करेगा। उसके पास भी एक रास्ता होगा, उसके पास भी एक मंज़िल होगी, वो भी हर बंदिश से आज़ाद होगा। वो रात में भी ख़्वाब देखेगा और दिन में उनकी ताबीर तलाश करेगा।

किसी को रौशनी की तलाश है तो कोई अंधेरे की फिराक़ में है। हमें अंधेरों से मोहब्बत तो नहीं लेकिन अंधेरे में चमकती हुई चीज़ें अच्छी बहुत लगती हैं। कोई आए और अंधेरे में ऐसी शमा जलाए जिसकी चमक कभी कम ना हो, जिसकी रौशनी कभी ख़त्म ना हो, जो भटके हुओं को रास्ता दिखाए, जो भी इसे देखे देखकर मुस्कुराए, जिसकी तपिश से किसी परवानें की जान ना जाए।

Ishrat Alig

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