किसी से दिलचस्पी कब प्यार में बदल जाए पता ही नही चलता ओर प्यार कब मोहब्बत बन जाए कोन जाने, मोहब्बत बढ़ जाए तो दीवानगी बन जाए और दीवानगी हद से गुज़र जाए तो इश्क़ बन जाए लेकिन जब इश्क़ हद से गुजरता है तो जुनून बन जाता है।
इश्क़ अपने आपमें एक बगावत है, ये रस्मों को तोड़ता है, नई कहानियां लिखता है, नए रास्ते बनाता है, नई मंज़िलें क़ायम करता है, खुद को भूल जाता है बस अपनी चाहत को याद रखता है।
लोग कहते हैं जिसे इश्क़ हो जाता है वो किसी काम का नही रहता, ये तो बस कोई दीवानों से पूछे के मोहब्बत से बड़ा काम और क्या होता है। ये कमाल तो इश्क़ का ही है वरना इतना आसान नही है किसी की चाहत में अपनी हस्ती को फना कर देना।
Ishrat Alig
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