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एहसास:

अगर भूक एक एहसास है तो ये खाने से क्यों मर जाती है क्यों ना महज़ खाने के तसव्वुर से ही पेट भर जाता है, क्यों ना सिर्फ पानी को देखकर ही प्यास की शिद्दत ख़त्म हो जाती है। अगर दर्द सिर्फ एक एहसास का नाम है तो लोग इसकी दवा क्यों करते हैं, अगर मोहब्बत एक एहसास है तो दिवानों को मिलन की ख्याहिश क्यों है, क्यों किसी ने किसी की यादों का नाम बेवफ़ा रखा है।
ये एहसास कभी दिल की तड़प है तो कभी दिल का सुकून, ये कभी कोई हंसी ख्वाब है तो कभी दर्दनाक हक़ीक़त, ये किसी की ख़ुशी है तो किसी का ग़म, ये किसी के लिए अकेलापन है तो किसी के लिए भीड़, किसी के लिए मिलन है तो किसी के लिए जुदाई।
किसी को अपने छोटे होने का एहसास है तो कोई ये एहसास करता है के वो बड़ा बन सकता है। कोई किसी की बात का एहसास करता है तो कोई बेबात पे ही एहसास कर रहा है, किसी को अपने होने का एहसास है तो किसी को यह एहसास के शायद वह है ही नहीं, किसी को कुछ पाने का एहसास है तो किसी को कुछ खो जाने का एहसास।
कोई किसी को ये एहसास दिलाता है के वो उसको कितना चाहता है तो किसी को ये एहसास ही नहीं के चाहत भी कोई चीज़ है।
कोई बस्तियां जलाकर खुश है तो कोई इनको फिर से बसाना चाहता है, कोई ज़िन्दगी बचाकर ख़ुशी का एहसास करता है तो कोई ज़िन्दगी लेके खुश होना चाहता है। यूँ तो लोग अक्सर लाशों को देखकर आंसू बहाते है लेकिन कुछ ऐसे भी जो इनकी गिनती से खुश हैं।
एहसास का मर जाना ज़िन्दगी से जीने का एहसास छीन लेता है लेकिन एहसास का हद से बढ़ जाना ज़िन्दगी का जीना मुश्किल कर देता है।

Ishrat Alig

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